ज़रूरी है( कविता) स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु-20-Feb-2024
दिनांक- 20,02, 2024 दिवस-- मंगलवार स्विषय-ज़रूरी है स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु
समय के साथ बदलना ज़रूरी है, ज़िंदगी में अनवरत चलना ज़रूरी है, बिन बदले कभी ज़िंदगी आगे नहीं बढ़ती, उत्थान राष्ट्र का करने को, व्यवधानों से लड़ना ज़रूरी है।
राह जितनी भी मुश्किल हो, एक दिन आसान होगी, ठोकरें खाकर ही हम पर, किस्मत मेहरबान होगी, किस्मत बनाने को , परिश्रम करना ज़रूरी है। उत्थान राष्ट्र का करने को, जलना ज़रूरी है।
एक छोटे से दिए से , अंँधेरा घबरा है जाता , चिरागों सा ख़ुद को जलाओ, अंधेरा वहाॅं टिक न पाता, अमावस का तमस हरने को, दिवाली को लाना ज़रूरी है। उत्थान राष्ट्र का करने को, अनवरत चलना ज़रूरी है।
प्रगति पथ पर जब बढ़ेंगे, व्यवधान आ राह रोक लेंगे, दो- चार नहीं आएंँगे आएंँगे भी बड़े थोक होंगे, किंतु, गंतव्य को हासिल करने हेतु, व्यवधानों को कुचलना ज़रूरी है, उत्थान राष्ट्र का करने को, अनवरत बढ़ना जरूरी है।
साधना शाही वाराणसी
Shnaya
21-Feb-2024 01:10 PM
Nice one
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Mohammed urooj khan
21-Feb-2024 12:10 PM
👌🏾👌🏾👌🏾
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Shashank मणि Yadava 'सनम'
21-Feb-2024 09:16 AM
बेहतरीन
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